Sunday, 12 Jun 2022 05:37 PM आज खाले किरिया संगी ,संग ल नहीं छोड़च मोर। कतको आही विपदा ह, फेर मुंह ल नई फेर च तोर, जिन्दगी ल संग बिताबो , दुख au सुख म । रखबे चाहे महल के भीतरी, चाहे कोनो रुख म। आज खाले किरिया संगवारी, छोड़च नहीं मोर साथ ल ।2 तोर मया के बंधना म बांध के रखबे, जब तक रहिबो साथ न। झन छोड़बे मोर संग ल संगी, कुछु कहय ये बैरी समाज ह। झन छोड़बे मोर संग संगवारी, मत तोड़बे विश्वास ल। चुटकी भर सिंदूर ल लेके मांग म मोर सजा देबे। ले चलबे तोर अंगना म संगी डोला म बैठाके । तैं बनबे मोर राजा जोही , मोला हृदय के रानी बना लेबे । अतके मागव मोर विधाता ले नई , कर्व कुछु दुसर आस । जब तक ये जिंदगी रही झन छोड़बे मोर साथ ल। आज खाले किरिया संगी झन छोड़बे मोर साथ ल written by Rajendra yadav