Friday, 10 Jun 2022 10:45 AM तै मटर मटर करत रहिथस , आथस हमर पारा। तोला बनाहु गोसैनिन , तोर भाई ल बनाहु सारा। अब हा कहिदे मोला गोरी , काबर के नईए कुछू तोर में चारा कतको टुरा ल देखत रहिथस , दिल म चल जाथे आरा । तै मटर मटर करत रहिथस , आथस हमर ओ पारा । तोला बना लेतेव सुवारिन ओ, तोर भाई ल बनातेव सारा । चाहे चलवाले तोप बंदूक लग जाएं चाहे पुलिस के धारा । तोर मोर चरचा होवत देखतो सबो पारा। तोर बर मर जहू , खावत हव कीरिया । त भो मोर दिल म रहि, तोर बर मया au पिरिया । हां कहिदे ,ओ गोरी , त मैं अभी डोला लेे जाहू नई मनही तोर दाई ददा। त तोर घर ले मैं तोला भगाहू । मान जाना गोरी ओ तैं , तोला दिल के मैं रानी बनाहू ए जनम ले जनम जनम के, वादा ल मैं ह निभाऊ। रोवन नई दव, कभू तोला जीनगी भर तोला हसाहू किसम किसम के गहना , म तोला सोन पुतरी कस सजाहू। जेन कईभे रानी ओ तैहा , वोही ओ तोर बर लाहू , अही कहू महाशिवरात्रि त , लोरमी के मेला ल घुमाहू, अब मटर मटर झन मट मटा काबर के तोही ल मय ह बिहाऊ। written by Rajendra yadav